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Promotion of Art and culture of india

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  भारत विविधताओं से भरा देश है। यहां हर तरह का मौसम ,   हर तरह के लोग आपको मिलेंगे और उनके अनुभव भी बहुत ही दिलचस्प मिलेंगे। भौगोलिक व सामाजिक रूप से बहुत - सी कहावतें प्रचलित हैं ,   जो कम शब्दों में बहुत ही गंभीर बात कह देेती हैं। ऐसी ही एक कहावत है .....   कोस - कोस में पानी बदले तीन कोस में वाणी अर्थात यहां एक कोस में पानी की तासीर बदल जाती है और तीन कोस में वाणी। इसलिए आपको भारत में न जाने कितनी भाषाएं व बोलियां मिल जाएंगी ,   जो उस क्षेत्र की पहचान भी होती हैं। इसी तरह भारत के अलग - अलग क्षेत्र में वहां की कुछ विशेषताएं भी बहुत प्रसिद्ध हैं। कहीं पर पीतल की कलाकारी मशहूर है तो कहीं पर बांस की ....   कहीं पर बांसुरी तो कहीं पर चित्रकारी ...   इन सब कलाओं को वहां के अनुभवी कलाकार अंजाम देते हैं। उन्होंने अपने पूर्वजों से वह कला सीखकर उसे अनवरत आगे बढ़ाया। साथ ही आने वाली पीढ़ियों को भी हस्तांतरित किया। ग्लोबलाइजेशन व मशीनीकरण ने आज उपभोग व उत्पादकता तो बढ़ा दी है लेकिन इसकी प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से उन्हें बहुत हानि हुई है जो पारम्परिक कार्य से जुड...
नमस्कार , सकोया फाउंडेशन की तरफ से शुभ कामनाये। आपको यह जान कर हर्ष होगा की हमारी संस्था सकोया फाउंडेशन भी 80-G और 12 -A  में रजिस्टर्ड संस्था है. हम किसानो के विकास के लिए कार्य कर रहे है. हमारा संपर्क भारत के  ग्रामीण क्षेत्रों मैं वसे हुए उन किसानो से है जो की अपने सीमित संसाधनो से फसलों का उत्पादन कर रहे हैं, हमारे  देश की 70 % आबादी अभी भी कृषि और कृषि से जुड़े हुुए उद्योगों में लगे  हुये है, कृषि से आजकल अच्छी आमदनी नहीं रह गई है इसलिए ग्रामीण भारत के लोग शहर के तरफ रुख कर रहे है. यदि यही हाल रहा तो भारत मैं कृषि उत्पादन में कमी आएगी और शहरों की तरफ जनसंखया का दबाब बढ़ता  ही जायेगा. और इसके कारण बहुत की बड़े स्तर बेरोजगारी फ़ैल जाएगी। इसी विषय को ध्यान में रखते हुए ,हमारी संस्था का प्रयास है कि किसानो को विभिन्न प्रकार से सहयोग करके गावों मैं ही कृषि और कृषि से जुड़े हुए उद्योगों को सरकार और गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा सहयोग कर के किसानो की आमदनी को वढाने के लिए प्रयास किये जाएँ। इसी प्रयास के लिए हमारी संस्था गावं गावं  जाकर किसानो के बारे में जानका...